विनती - हैप्पी वेलंटाइन डे।प्रयास - हैप्पीजी तो सिंह थे, वेलंटाइन कब से हो गए?
विनती - हैप्पी वेलंटाइन डे।
मैं क्यों हार मानूं।
आदरणीय परम पूज्यनीय देवो के देव महादेव को मै नेत्रहीन शंकर शत्त शत्त प्रणाम करता हूँ। काफी समय से आप को पत्र लिखने का सोच रहा था पर हिम्मत ही नही हुई । डर लगता था की जन्म लेने की गलती पर तो आप ने नेत्र खुलने से पहले ही बंद कर दिये कही कुछ और गलती कर दी तो ना जाने क्या दंड देंगे । पर अब डर नही लगता क्यों की अब समझ गया हूँ की नेत्रहीन से बड़ी सज़ा शायद नही हो सकती। आप ये कदापि ना समझे की यह पत्र आप की इस कृति की आलोचना करने के लिए लिख रहा हूँ क्यों की ना मुझ में क्षमता है ना इच्छा है।बस छोटा सा अनुरोध है की देश मै करोड़ो बच्चो के पास रोटी तक नही है सम्पूर्ण आहार ,स्वस्थय व शिक्षा की कल्पना तो करते ही नही है। इसलिए कृपा निधान कुछ कीजिये एक रोटी का अधिकार तो दीजिये या आप भी हमे आधा अधुरा (कईयों को अंग नही और अधिकतरो की किस्मत नही) बना के भूल गये जैसे चुने हुए लोग हमें भूल गये और व्यस्त हो गये करोड़ो कमाने में कोई खेल के नाम पर कमा रहा है ,कोई शहीदों की विधवाओ की ज़मीं पर इमारते बना के और कोई करोडो की बईमानी कर के राजा बन रहा है और जनता गुलाम जो गरीब से गरीब होती जा रही है। फिर कैसे हर दिन देश विकास दर पार कर रहा है जहाँ लाखो में किसान मर रहें है लाखो मै बेरोजगार घुट रहें है करोड़ो भूखे इन्सान सो रहें है, उस देश मै सेव टाइगर का नारा बुलंद हो रहा है।
विद्या का प्रसार है दिवाली।
मम्मी सो रहा हू ,गुड नाईट
आज नहीं तो कल,
आज स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर झंडा-रोहन समारोह के बाद सलोनी और गली के सब बच्चे घूमने समुंदर के तट पर गये। सुनहरी बालू, धूप में चमक रही थी, बच्चे खुले आकाश में पंछी की तरह इधर-उधर दौड़ रहे थे, सब खुश थे। सलोनी ने वैसे ही देखा की एक बोतल बालू में धंसी हुई है।उसने अपने सारे दोस्तों से कहा देखो वह बोतल कैसी है? एक ल़ड़के ने कहा 8-9 शताब्दी पुरानी लग रही है। सलोनी ने कहा चलो उस बोतल को देखें। सलोनी और सब बच्चे उत्सुकता से भागे, सलोनी ने बोतल उठाई और सब बच्चे उसके पीछे दौड़े जैसे ही एक बच्चे ने कहा इस में बम हो सकता है वैसे ही सलोनी ने बोतल बालू पर फेंक दी। सब बच्चे पीछे हट गए और आश्चर्य भरी आंखों से देखने लगे, कुछ समय पश्चात् सलोनी ने कहा बोतल खोलकर देखते हैं क्या मालूम इसके अंदर क्या हो?
सलोनी और सारे बच्चों ने अपने-अपने इश्वर को याद किया और उस बोतल को खोला। एक दम से काला धुआं चारों ओर फैल गया सब बच्चे चारों ओर भागे किसी ने कहा मां बचाओ तो किसी ने कहा अम्मी बचाओ और किसी ने कहा बेबे मैंनू बचा। बच्चे चिल्लाते हुए भाग रहे थे की एकदम से काला धुआं एक छोटे से बच्चे में बदल गया। सलोनी ने कहा अरे यहां सब आओ ये तो जिन्न है ये बच्चों का दोस्त है। सब धीरे-धीरे सहमे से आए - सब में हल्का सा डर था लेकिन कुछ समय पश्चात् सब उसके पास आ गये,किसी को अब उससे डर नहीं लग रहा था।
सलोनी ने उस बोतल से निकले बच्चे से पूछा "तुम्हारा नाम क्या है ?
"मैं सत्य हूं।
सलोनी ने फिर पूछा,तुम कहां से आए हो?
वह बच्चा रो दिया, सलोनी ने कहा, " तुम रोओ मत, नहीं बताना चाहते हो तो मत बताओ लेकिन रोओ मत।
मैं रो इसिलए रहा हूं कि मेरे देश वाले मुझसे पूछ रहें हैं कि मैं कौन हूं अरे मैं भारत का हूं यह देश मेरा है। यहां के लोग केवल सत्य बोलते थे। विश्व में सिर्फ एक यही देश था जिस देश में सब शांति और भाईचारे से रहते थे। क्योंकि मैं यहां पर रहता था। सत्य। लेकिन व्यक्तियों के स्वार्थ ने मुझे इस बोतल में बंद कर दिया था उसके बाद हिंदू, मुस्लिम, सिक्ख आदि धर्मों का जन्म हुआ, उससे पहले यहां मनुष्य ही रहता था। इन सबके जन्म के बाद से ही शोषण, दंगे, खून खराबा शुरू हो गया। अब मैं आजाद हूं। मैं सत्य हूं। मैं हर बच्चे, जवान, ब़ूढे में मिल जाऊंगा और फिर से भारत को महान बनाऊंगा।
फिर सत्य -सत्य को फैलाने के लिए चल दिया। सलोनी और सब बच्चे शांत खड़े रहे। कुछ समय उपरांत सलोनी ने कहा अरे हम सब तो एक हैं और रहेंगे। दूर से सत्य ने देखा और सोचा मेरा अस्तित्व खत्म नहीं हुआ है मैं आज भी अपने देश में सत्य फैला सकता हूं। सिर्फ संकल्प की आवश्यकता है। सलोनी औरसारे बच्चे सत्य के साथ हैं और हम .............
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आज हम सब प्रदर्शनी देखने जा रहे है। वहा पर कई तरह की सब्जियां,दालें और फल होगे। स्वादिष्ट और रसीले फल, मैंने तो कुछ बचपन मै खाये भी है{हाउ लककी आइ ऍम} पर पाषण और आर्य नेतो बस तस्वीरो में ही देखे है ।भाभी कल से समझा रही है सब तमीज़से और दूर से देखना कुछ छूना मत ,कही कुछ खराब मत कर देना । वैसे पाषाण और आर्य शैतान भी है।जहाँ खाने की चीज़ देखते है मचलजाते हैं ।आप मानेंगे नही कल रात एक चैनल पर जैसे ही दाल कीतस्वीर दिखायी - दोनों जिद्द करने लगे की हमे चाहिये बड़ी मुश्किलसे माने और समझे की ये दाल की पुरानी तस्वीर है जैसे पिछले हफ्ते डायनासोर के बारे मै बतया था ।इसका मतलब ये तो नही की डायनासोर अभी तक है, वो इतिहास के पन्नो में है और इतिहास केपन्नो में जो कैद हो गया वो वापस कभी नही आटा हँ हँ आटा नहीआता क्या करू ऐसी हालत कर दी है की दिमाग पर भूख ही हावी रहती है ।
ना जाने आज सुबह मैंने कैसे अपने भतीजे से पूछ डाला।
सत्यनारायणजी........... सत्यनारायणजी घर पर है क्या ?