Wednesday, 27 June 2012

नई शुरुआत

प्यारे पापा,
सॉरी जो मैंने जन्म लिया और आप की तकलीफों का कारण बनी ये आखरी मेल  लिख रही हू आज के बाद ना मैं कष्ट में होउंगी ना आप को आसुओं से सराबोर मेसेज करुंगी।
पापा मैं बहुत थक गयी हूं व टूट गयी हूं। अब मुझ मे जरा सी भी हिम्मत नहीं बची है कि समझ और परिवार के बारे मे कुछ सोच सकूं। सच्ची पापा अब थक गयी।
पापा जो करने जा रही हू पता नहीं सही है या गलत पर अब करके ही रहूंगी। शादी के बाद पहली बार कोई निर्णय लेने की हिम्मत हुई है अब नहीं सोचुंगी बस करके रहूंगी।
9 साल से खौफ के साये में मरे जारही हूं सुबह आंख खुलती है तो सिहर जाती हूं की आंख क्यों खुल गयी। अब फिर घर के काम का डर, नाश्ते से रात्रि भोज तक मे कुछ गलत ना हो जाये नहीं तो बेल्ट फिर काली से लाल हो जाएगी। पापा भूखे पेट खाली रात खा के सोना आसान नही होता। जि़न्दगी कचोटने लगती है। ऐसा लगता है दिन जल-जल के रात हो गई है और फिर लगता है दिन नही जि़न्दगी रात हो गयी है। अब शारीर और आत्मा साथ नही दे रहा है इसलिए पति को परमेश्वेर से मिला रही हू जैसे मे भी ख़ुशी से कह सकूं मेरे पति परमेश्वेर  हो गये।
पापा आज पति का जीवन मुक्त कर के आराम से भय मुक्त सोउगी  और कल से नया जीवन शुरू करुंगी इसलिए अगर आप ये मेल सुबह-सुबह पड़े तो प्लीज जगाइएगा नहीं जब उठुगी तो अपने आप पुलिस को बुला लूंगी।

आप की सदा
करुणा

3 comments:

  1. अत्याचार से विवश एक लड़की की विषम मनः स्थिति को दर्शाती अच्छी पोस्ट ....

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  2. आपने एक पीड़िता के मनोभावों को बहुत अच्छी तरह व्यक्त किया है...
    मन भर आया...

    अनु

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