Friday, 25 June 2010

मेरा भारत महान ________ (है / था)

त्यनारायणजी........... सत्यनारायणजी घर पर है क्या ?
पूजा - समझ
नही आता तुम्हारे दोस्त कब घंटी बजाना सीखेंगे
चिल्ला रहें है गंवारो की तरह, अरे रिटायर्ड आदमी घर पर नही होगा तो क्या तुम्हारी तरह सुबह - सुबह दुसरो के दरवाजे पर होगा
सत्यनारायणजी - मिश्रा साहब घर पर ही हूँ - आजायें
पूजा - अब चाय बनाओ, अरे इतनी महंगाई है और इतने काम होते है आ गायें सत्यनारायणजी करते हुए
मिश्रा - नमस्कार भाभीजी, मैंने कहा नमस्कार!
पूजा -
नमस्कारजी!
मिश्रा - क्या बात है आज भाभी उखड़ी हुई लग रही है सत्यनारायण लडे क्या?
पूजा - नही- नही, बस आप का ही जिक्र चल रहा था की मिश्राजी शाम को भी क्यों नही आते?
मिश्रा - ओह.... क्षमा चाहूंगा.... क्या करूँ भाभी अब चलने में तकलीफ होती है, आज से रोज़ आऊँगा - खुश!!
सत्यनारायण - चाय बना देती!
मिश्रा - यही बात बुरी लगती है , तुम भाभीजी को चैन से बैठने नहीं देते हो, भाभीजी चाय मत बनाईये - मैंने आज से चाय पीनी छोड़ दी है
सत्यनारायण - क्यों मिश्राजी चाय से क्या नाराज़गी?
मिश्रा - नही मैंने अब नाराज़ होना छोड़ दिया है बस अब पानी के संग रोटी खाउगा आखरी साँस तक

सत्यनारायण - मगर क्यों मिश्राजी?
मिश्रा - महंगाई को देखिये (गैस ३५ रुपये बढ़ गयी, पेट्रोल 3. रूपये ७३ पैसे , डीजल २ रूपये और केरोसीन ३ रुपये ) जंगली बेल की तरह बढती जा रही है

पूजा - भाई साहब निराश मत होईये जल्द ही सब ठीक हो जयेगा आखिरकार मेरा भारत महान है
मिश्रा - पता नही महान है या था मुझे तो सिर्फ अंधकार दिख रहा है हर चीज़
नीलाम होते दिख रही है अब तो सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दाम तय करने की सरकारी व्यवस्था को ही खतम कर दिया अब महंगाई कहा से कम होगी - हाँ गरीब जरुर कम हो जायेंगे
सत्यनारायण- ऐसा क्यों सोचते हो?
मिश्रा - गलत हूँ तो बोलिये हर जगह हाहाकार मचा है और सरकार कहती है हम मजबूर है , किस से?? खुद की गलत नीतियों से कुछ प्रतिशित लोगो को दिखा के कहते है हम तरक्की कर रहें है
अरे भारत की राजधानी में ८ से १० घंटे बिजली जाती है तो गाँव में क्या हाल होगा - पीने के पानी के लिए खून हो रहें है और सरकार कहती है प्रगति हो रही है
आज शक्कर ४० रूपये बिक रही है तो मोबाइल की सिम मुफ्त में बिक रही है
६५ रुपये में दाल बिकती है तो ६० पैसे मै कॉल दर बिकती है
सब्जी सड़क पर बिक रही है और चप्पल ऐ. सी. दुकानों में
१२ % पर शिक्षा का लोन मिलता है पर कार लोन ५% पर मिल जाता है

पूजा -हमारे देश में लोकतंत्र है, सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना ही पड़ेगा
मिश्रा - कैसी बात कर रही है, आप को अब भी लगता है किसी सवाल का जवाब मिलेगा
२५ सालो से इंसाफ मांग रहें है और उन्हें इंसाफ की जगह भीख मिली
सत्यनारायण- ऐसा नही है १० लाख मिलेंगे
मिश्रा - १० लाख!! २५ सालो से हिसाब लगा के देखिये - ३३३३.३० रूपये महिना ही पड़ा है, कोई कुबेर का खज़ाना नही दे दिया है
वो भी २५ सालो बाद वादा किया गया है वो भी इसलिए क्योंकि इनके देशप्रेमी ब्रांड के लोगो ने ही भगाया था जिसने २५ हजार लोगो को मारा था लाखो लोग तो अभी भी बीमारी से पीड़ित है जब की उनके देश में एक आदमी ने ५ हजार लोगो को मारा तो उन्होंने दो देशो को खत्म कर दिया और अभी भी तलाश जारी है और हम ने अपने विमान में २५ हजार लोगो के कातिल को रवाना कर दिया और ये भी कह दिया की आइयेगा जरुर नाम बदल - वर्ना डोव कंपनी कैसे वापस भरत में पैर रख रही है - बिना इन सब की मिली भगत के ?
सत्यनारायण- देश को उधम सिंहजी की जरुरत है

मिश्रा - मेरे कवी मित्र (तरुणजी) भी यही कहते है पर उधम सिंहजी मारेगा किसे जिसने मारा या जिसने भगाया ?
सत्यनारायण- इस सवाल का तो
उत्तर मिलना चाहिये ही?
मिश्रा - देखिये कब मिलता है २५ साल तो होगये और कितने साल व किस पीढी को
उत्तर मिलेगा, इंतजार करना पड़ेगा - पर जिस दिन भी उत्तर मिला हर घर में उधम सिंहजी का जन्म होगा

Saturday, 19 June 2010

दीवार पे लटकी तस्वीर

ना जाने क्यों मेरी आंखों में अखरती है,
क्यों मुझे अहसास कराती है अपनी भूलों का।
दीवार
पे लटकी तस्वीर,
घर के कोने में लटकी तस्वीर

ना जाने क्यों मुझे विचलित करती है,
पुरानी हर बातों को ताजा कर देती है
दीवार पे लटकी तस्वीर,
घर के कोने में लटकी तस्वीर

ना जाने मुझे क्यों प्रश्नजाल में फंसा देती है,
उत्तर कहने के पश्चात भी एक नया प्रश्न उजागर कर देती है
दीवार पे लटकी तस्वीर,
घर के कोने में लटकी तस्वीर

ना जाने क्यों मेरा ध्यान खींच लेती है,
बीती हुई बातें शब्द सहित बता देती है
दीवार पे लटकी तस्वीर,
घर के कोने में लटकी तस्वीर

ना जाने क्यों मुझे भयभीत कर देती है,
बच्चों को झूठी कहानी कहने पर विवश कर देती है
दीवार पे लटकी तस्वीर,
घर के कोने में लटकी तस्वीर

ना जाने क्यों मुझे भूत से भविष्य की ओर ले जाती है,
इस तस्वीर में मुझे अपनी तस्वीर क्यों नजर आती है।
दीवार पे लटकी तस्वीर,
घर के कोने में लटकी तस्वीर

चित्र www.google.com से लिया गया है।

Sunday, 13 June 2010

रिजेक्ट

मैं फिर रिजेक्ट हो गयीघर मे मातम पसरा है, जैसे देश मे धमाके के बाद पीड़ित परिवारों मे हो जाता है और टीवी पर दिखा रहे और देख ने वालो के लिए एक रिअलिटी शो से ज्यादा कुछ नही होता है वो ही माहोल हमारे घर का था माँ ,पापाजी और भाई दुखी थे और दूसरी तरफ रिश्तेदार इस घटना का लुत्फ़ उठाने और अपनी विशेष टिप्पड़ी देने मे व्यस्त थे, कोई दुखी दिख के मज़ाक उड़ा रहा था कोई ज्ञानी बन के, पर मज़ाक सब उड़ा रहें थे
जब सब को लगा पापा और मम्मी ध्यान नही दे रहें है या ये कहे स्वयं ही खोये हुए है तो बुआजी ने चिर परिचत अंदाज़ मे रोना शुरू कर दिया और २७ सालो से बलि का बकरा बनती आ रही माँ को ताने मारना शुरू कर दिया उमा की ही गलती है उसने ही बच्चो का ठीक से लालन पालन नही कीया, मेरी फूल सी बच्ची पर थोडा सा भी ध्यान रखा होता तो आज रिजेक्ट नही होती, बेचारी, सातवी बार लड़के वालो ने मना कीया है कितना बुरा लग रहा होगा, काश उमा मे थोड़ी सी अक्ल होती, अरे अब लड़की तुम पर चली गयी तो थोडा केयर कर लो, तुम्हारा वाला जमाना चला गया - की काली है फिर भी शादी हो गयी वैसे होता तो पहले भी नही था, पर छोड़ोइसके कारण मेरी बच्ची की ज़िन्दगी बर्बाद हो रही है कौन करेगा इससे शादी और करेगा भी तो कितनी बार ना सुनने के बादउमा रो रो के कमजोरी हो रही है और तू बुत बनी खड़ी है, चाय ही पिला दे मेरे भाई और हम सब को
माँ - जी
बुआजी - देख हर चीज़ बतानी पड़ती हैहे राम इस का क्या करा जाये, कुछ नही आया अभी तक ,चलो शादी से पहले कुछ नही सीखा पर अब तो सीख लो, वही बात है जब माँ को ही कुछ नही आता तो बच्चो से क्या उम्मीद करे - गोरी भी नही और संस्कार भी नही, अब तो चमत्कार ही हो तो बात बने

राहुल - दीदी पे रिजेक्ट का टेग ना लगाये. गोरी का क्या मतलब?? जैसे भारतीय होते है वेसी ही तो होगी या फिर गोरे होने के लिये फैर की बोतले पीले हद ही हो रही है सब ऐसे कह रहें है जैसे लड़के ह्रतिक रोशन हो एक बार अपने लडको को तो देख लो गोरी, लम्बी चाहिये, अरे शादी के बाद मोडलिंग करवानी है मेरी बहन की शादी हो जायेगी किसी को चिंता की जरुरत नही है

शरद चाचा - अरे मेरे युवराज तेरी दीदी को कोई कुछ नही कह रहा है,बस बात कर रहें है, आखिरकार हमारी भी बच्ची है, क्यों बिटिया बोलो, कुछ बोलना है तो बोलो, नही बोलना, कोई बात नही, बिटिया सब जानती है सब शांत रहो एक और लड़का है उसे कल अपनी बिटिया को दिखा देते है शायद वो हाँ कह दे वर्ना और लडको को दिखायेंगे, कोई तो हमारी कल्लो परी को हाँ कर ही देगा अब इतनी भी काली नही है

राजा चाचा - हाँ इतनी काली नही है ########
प्रफुल चाचा - ########
शरद चाचा -######
ममता बुआ -#######

सब खुद को महत्वपूर्ण सदस्य बताने मे व्यस्त हो गये है और मैं स्वयं में अभी मेरी स्थिति प्रधानमंत्री जैसी ही है ना कुछ बोल सकती हूँ ना कुछ कर सकती हूँ क्यों की हाई कमांड (पापाजी) बोलने की स्थिति मे नही थे और उन्हें सब को ले कर परिवार (सरकार) भी चलाना था
वर्ना ममता बुआजी या शरद चाचा अलग होने की धमकी दे देगे तो राहुल भाई के करियर (पे जो सब ने खर्चा कीया है वो वापस ले लिया तो) पर अल्प विराम लग जायेगा !

चित्र www.google.com से लिया गया है।

Saturday, 8 May 2010

"क" से "किताब"

त्रकार बेटी उठो और भाई की कमीज़ प्रेस कर दो
रिचा - माँ अभी प्रेस करती हू, पर मुझे प्रेस नही ज्वाइन करनी है
क्या प्रेस नही ज्वाइन करनी ?
रिचा - जी हाँ` मैं पत्रकार नहीं बनना चाहती
क्यों इतने संघर्ष के बाद तो सपना सच होता दिख रहा है
रिचा - माँ सपने और हकीकत मे अंतर होता हैं
मेरी बेटी ऐसा मत कह, मैं तुझे अपने पैरो पर खड़ा देखना चाहती हूँ
रिचा - मैं पत्रकार बन भी गयी तो इस का अर्थ ये तो नहीं की मुझे आज़ाद ज़मी मिल जायेगी, मुझे निर्णय लेने की अनुमति मिल जायेगीमुझे यकीन है जिस दिन मैंने निर्णय लेने का सोचा भी तो मुझे निरुपमा की तरह लटका दिया जाएगाऔर कहा जाएगा इस ने नारी हो के निर्णय लेने जैसा जघन्य अपराध कीया है
रिचा तू प्रेम विवाह का सोच रही है?
रिचा - माँ प्रश्न प्रेम विवाह का नहीं, प्र्श्न अपना निर्णय स्यंव लेने की आजादी का है
रिचा होगा वही जो हम चाहेंगे
रिचा - मैं जानती हूँ मुझे मत देने का अधिकार है निर्णय लेने का नहींमुझे बिलकुल भ्रम नहीं है की मुझे शिक्षा ज्ञान के लिये नही प्रणाम पत्र के लिये दी जा रही है, जिस से हम आधुनिक कहलायेंगे और मेरी शादी भी हो जायेगी
तुझे लड़के की तरह रखा और तू ऐसे कह रही है
रिचा - ये ऋण तो जीवन भर नहीं उतार सकती, यदि मुझ मे और भाई मे अंतर नही है तो फिर मेरे लिये अहसान का भाव क्यों है?
की लड़की होते हुए भी हम पड़ा रहे है, हम कितने महान है
माँ यहाँ इच्छा, शिक्षा, स्वतंत्रता, निर्णय लेने की आज़ादी नहीं हैमूल लक्ष्य तो वही है ना पढ़ा लिखा के शादी करा दो जो चंद मुझ जैसी भाग्यशाली लडकियों को पढाया जा रहा है, वो भी मात्र शादी के लिये वरना "" से "किताब" भी नहीं पढाया जाता
रिचा - माँ से मम्मी, मम्मी से माँम कहलवाने से, सलवार से जींस, जींस से स्कर्ट पहनवाने से कोई विकसित नहीं हो जाता कहने का अर्थ सिर्फ इतना है - मुझे निर्णय लेने की स्वतंत्रता दीजिये, मुझ पर विश्वास कीजिये मैं सही निर्णय ले सकती हूँ और क्षितिज को छू सकती हूँ


पापा - चुप, बिलकुल चुप - माँ को हैप्पी मदर्स डे कहो, ठीक से पढो पत्रकार बनो और शादी करो वरना प्रश्नों का अंत करना हमे भी आता है

चित्र www.google.com से लिया गया है।

Saturday, 1 May 2010

मज़दूर

मजदूर क्यों अपना वक्त जाया करता है,
मात्र एक रोटी के लिए जीवन यापन करता है
क्यों नहीं तू भी कल्पना की चादर ओढ़ स्वप्न नगरी में जीवन व्यतीत करता है,
कम से कम रोटी को तो करीब पाएगा तेरा जीवन तो इसी में तर जाएगा

Friday, 16 April 2010

मेड इन चाइना

मुन्ना, मुन्ना
महेंद्र - क्या है पापा?
मुन्ना बात करनी है।
महेंद्र - आ रहा हूं। पापा कुछ तो दूसरों का ख्याल रखा कीजिए। अभी उठा हूं और आपने चिल्लाना शुरू कर दिया। मैं भी इंसान हूं।
मुन्ना! दूसरा .. ओह सॉरी!
महेंद्र - ओह! प्लीज, अब ये शुरू मत कीजिए- आप सॉरी कहें और मैं आपकी मिन्नतें करने लगूं, नहीं पापा-नहीं पापा। अब कहिए क्या कहना है।
कुछ नहीं मुन्ना।
महेंद्र - अब कहिए, नहीं तो कल कहेंगे कि मैं सुनता नहीं हूं।
मुन्ना नहीं कहूंगा। तुम तैयार हो जाओ। तुम्हे ऑफिस जाना है।
महेंद्र - हां मैं अभी तैयार होकर आया। आज संग नाश्ता करते हैं।
जरूर मुन्ना।
महेंद्र - पापा मेरा नाम महेंद्र है मुन्ना नहीं। प्लीज मुन्ना-मुन्ना कहना अब बंद कीजिए। सुनने में बड़ा ही खराब लगता है।
महेंद्र नहीं कहूंगा।
महेंद्र - थैंक्स पापा।
मेरा बेटा बड़ा हो गया।
उंगली पकड़कर चलने वाला।।

उंगली दिखाने लायक हो गया।

मुन्ना से
महेंद्र हो गया।।
मेरा बेटा बड़ा हो गया।
जिज्ञासा - प्रगति बेटा उठो, कॉलेज जाना है। रानी उठो।
प्रगति- क्या मां एफ एम शुरू कर देती हो सुबह-सुबह। एक बार में सुन लिया उठ जाऊंगी।
महेंद्र - प्रगति क्या बदतमीजी है। मम्मी से कोई ऐसे बात करता है। हम आजतक अपने बड़ों से ऐसे बात नहीं करते।
प्रगति - अरे सुबह-सुबह लेक्चर नहीं, उठ गई ना अब शांत रहो।
प्रगति - मम्मी!!! डैडी को बुला लो ना।
महेंद्र - जा रहा हूं। जल्दी तैयार हो। नाश्ता संग करेंगे।
प्रगति - जाओगे तभी तो आऊंगी।

महेंद्र - अरे मैं तैयार होकर भी आ गया और कोई नाश्ता करने भी नहीं आया।
बेटा मैं तो कब का आ गया।
महेंद्र - ओह! सॉरी आपको देखा नहीं।
कोई बात नहीं आजकल मैं खुद को भी नहीं देख पा रहा हूं।
महेंद्र - पापा ये क्या पहना है।
धोती।
महेंद्र - वोह तो मुझे भी दिख रही है। पर ये क्यूं?
मुझे आराम मिलता है।
महेंद्र - नयी धोती भी तो पहन सकते हैं। पिछले सप्ताह ही लाया था।
मुझे आराम नहीं मिलता है उन धोतियों में।
महेंद्र - क्यों खादी तो है।
हां, पर आराम नहीं मिलता है।
महेंद्र - जो लाओ वही पसंद नहीं है।
बेटा क्या करूं, मुझे आराम नहीं मिलता है।
महेंद्र - वो तो अच्छी क्वालिटी की है।
होगी, पर मुझे सुकून नहीं मिलता है।
महेंद्र - ये सब बेकार की बात मत कीजिए।
जिज्ञासा - आपको कुछ नहीं, बस
महेंद्र जो लाए उसकी बुराई करनी है और पूरी दुनिया में हमें बुरा साबित करना है।
बहू ये सिर्फ तुम्हारी सोच है।
जिज्ञासा- हां मेरी तो अब सोच भी गलत है। एम.बी.ए. हूं। बारवीं फेल नहीं हूं।
बहू मुझे गर्व है कि तुम एम.बी.ए. हो। पर मैं कभी घर की बात सड़क पर नहीं करता।
जिज्ञासा - करने की क्या जरूरत है। इन चिथड़ों में घूमेंगे तो सब तो यही समझेंगे, छोड़ो मुझे नहीं बोलना। वरना कहेंगे बहू बड़ी तेज है।
ऐसा नहीं है बहू।
महेंद्र - तो क्यों नहीं पहनते हैं खादी धोती?
मैं बार-बार नहीं कह सकता, मुझे आराम नहीं मिलता।
महेंदर- छोडि़ए मत पहनिए। रहिए फटेहाल।
महेंद्र - इन्हें आराम नहीं मिलता। चाईना ने स्पेशल खादी धोती इंडियन्स के लिए निकाली है। और इन्हें धोती नहीं पसंद। जबकि नाम भी स्वदेशी है।
मैं चाईना की जंग में लड़ा था और आज चाईना का कपड़ा पहनने को कह रहे हो।
महेंदर- आपकी यही बात अच्छी नहीं है। पुरानी बातें दिल में रख लेते हैं। लड़ाई हुई खत्म हुई।
देश प्रेम भी कोई चीज है कि नहीं।
प्रगति - ये देशप्रेम क्या होता है।
महेंद्र - लव फोर योर कंट्री।
प्रगति- ओह! दैट इज आऊट डेटेड डैड।
देशप्रेम आऊट डेटेड कभी नहीं होता।
प्रगति - होता नहीं हो चुका है। आप किस दुनिया में हैं दादा।
प्रगति- आज फौजी इंडिया गेट के नीचे खुले में सोते हैं।
१५ अगस्त से ज्यादा लोग वेलेंटाइन डे मनाते हैं।
देश पर हमला होता है तो वेबपेज पर ज्ञान देते हैं। पर वोट देने नहीं जाते हैं।
वाइट शक्कर को ब्लैक में खरीदते हैं।
प्रगति- चलिए चलती हूं। कॉलेज के नाम पर दोस्तो के घर जाना है। वैसे भी सुबह मेड इन चाइना देशभक्ति की अगरबत्ती मेड चाइना भगवान के आगे जला चुकी हूं।
दादा बाय सोचिएगा। देश और भक्ति अपनी ही है या वो भी चाइना से इंपोर्ट हो रही है। हा..हा..हा....

मैं सोच में पड़ गया और आप .......

Sunday, 28 February 2010

शोर्ट टर्म मेमोरी लोस

जय -होली है होली है!
उमा - अरे सुबह सुबह शोर मत मचाओ, पडोसी डिस्टर्ब होते है
अजय - होने दो, होली है,आज शोर भी होगा और मस्ती भी होगी
उमा- हलके, चाय बनाने दो
अजय - आज तक समझ नहीं आया की चाय बनाने मै इतनी मेहनत कैसेलगती है ?
उमा - बनानी पड़ती है
अजय - अरे गैस पर पतीला रखने में क्या मेहनत..... कोई तुम्हे थोड़ी ना गैस पर उबलना है
उमा - हा हा वैरी फन्नी
अजय - अच्छा पर मै सिरियस था
उमा - मै सिरियस हो गई तो खाना बाहर से आयेगा
अजय - वैसे भी छुटी के दिन केवल चाय ही पिलाती हो और खाना बाहर का ही नसीब होता है
उमा - मै तो कुछ करती ही नही ना
अजय - मै हां कहूँगा तो लडोगी तो नही
उमा- नही....लड़ लो
अजय - नही लड़ सकता ना... वर्ना चाय भी नसीब नही होगी, तुम घंटे भर में चाय बनाओ मै भारत को जगाता हूँ
उमा - किसी को चैन से रहने मत देना ?
अजय - तुम से ही सीखा है, भारत उठो उठो होली है
भारत - गुड मोर्निंग डेड
अजय - अरे भारत उठा हुआ है
भारत - येस
अजय - उमा होली पर चमत्कार हो गया
उमा - क्या ?
अजय - बेटा बिना जगाये जग गया
भारत - डेड मैं बीमार हूँ
अजय - पहले क्यों नही बोला, अभी थर्मामीटर लाता हूँ
भारत - नही बुखार नही है
अजय - बेटा क्या तकलीफ है ? अभी चलते है डॉक्टर के पास यू विल बी फाइन
भारत - तकलीफ कुछ नही है पर मुझे लगता है हम सब को शोर्ट टर्म मेमोरी लोस की बीमारी होगई है
अजय - ये क्या बीमारी है?
भरत - वही जो आमिर खान को गजनी मे हूई थी
अजय - हा... हा... , बेटा वो सब फिल्मो मे होता है
भारत- नही डेड हम सब को यह बीमारी हो गई है
अजय - नही बेटा वो फिल्म दिमाग मे रह गयी इसलिए तुम्हे ऐसा लग रहा है
भारत - नही डेड आई कैन प्रूव
अजय - अच्छा तुम्हे क्यों लगता है की तुम्हे यह बीमारी है?
भारत - मुझे ही नही हम सब को
अजय - अच्छा हम सब को पर तुम्हे ऐसा क्यों लगता है?
भारत - शोर्ट टर्म मेमोरी लोस मे इन्सान को कुछ समय पहले की बाते याद नही रहती है
अजय - वो पता है, बेटा मुझे सब याद है , हम सब ठीक है बस तुम फिल्में देखना कम करो, अब उठो नाश्ता करोफिर होली खेलो
अजय - देखो आज होली है मुझे याद है हा..... हा!
भारत - वो आप को इसलिए याद है क्यों की होली आज की बात है लेकिन कुछ दिनों पहले की दुर्घटना याद होती तोआप होली की बात भी नही करते
अजय - क्या भूल गया , अभी तक तेरी माँ ताने मारती थी कुछ याद नही रखते अब तू भी बोलने लगा. बता क्याभूल गया
भारत - आप नही हम सब भूल गये की कुछ दिनों पहले देश मे धमाका हुआ था कितने घरो मे सन्नाटा फैल गया हैकितने जन अभी तक ज़िन्दगी के लिए लड़ रहें है इससे बड़ा क्या शोर्ट टर्म मेमोरी लोस का उधारण होगा डेड ज़िन्दगी किसी के लिए नही रूकती है, ना रुकेगी पर..... थोड़ी तो इंसानियत भी होनी चहिये?
भारत - कहिये हम सब शोर्ट टर्म मेमोरी लोस से पीड़ित है की नही?
भारत - डेड डोक्टर के पास चले.......

(यदि आप भी इस बीमारी से पीड़ित है तो जल्द ही अपने नजदीकी अस्पताल
मे दिखाइये)

Sunday, 14 February 2010

सोचिये

बाबा - भविष्य
भविष्य - जी, बाबाजी

बाबा - आज स्कूल नही गये ?
भविष्य - बाबाजी आज रविवार है, छुट्टी है

बाबा - अरे हाँ, भूल ही गया
!
बाबा- बेटा, वर्तमान क्या कर रहा है

भविष्य - पापा (वर्तमान) सो रहें है

बाबा - अभी तक? चलो सोने दो, बेटा मेरा एक ख़त लिखदेगा ?
भविष्य - जी बाबाजी, कहिये किसे लिखना है?
बाबा - अपने
पी. चिदंबरम को
भविष्य - बाबाजी आप कहिये मै लिखता जाता हूँ

बाबा - हाँ लिखो - प्रिय
चिदंबरम नमस्कार
भविष्य - आदरणीय चिदंबरमजी लिखूं?
बाबा- क्यों?
भविष्य - गृह मंत्री हैं ,हमे सम्मान करना चाहिये
बाबा - नही बेटा , हमे सम्मान व्यक्ति का करना चाहिए ना की उसके पद का
भविष्य - जी बाबाजी
बाबा - भविष्य लिखो, आप ने
२२ हज़ार पुलिस कर्मियों की मदद से माय नेम ईज़ खान सफलता पूर्वकचलवादी इस के लिए बधाई हो ।लेकिन एक बात पूछनी थी की २२हज़ार पुलिस कर्मियों की मदद तब क्यों नही ली गयी जब सड़क पर हमारे लोगो को भगा भगा के मारा जा रहा था व इन २२ हज़ार योद्धओ को सिनेमा घर की सुरक्षा के लिये खड़ा कर दिया गया इतनी कर्मठतता यदि कश्मीर, मुंबई, जयपुर,अक्षरधाम,गुजरात, पुणे में दिखाई होती तो आज लाखो भारतीय जय हो का नारा बुलुंद करते हुए माय नेम ईज़ खान देख रहें होते। अब ये ना समझे की मेरा कोई प्रियजन प्राणहीन हो गया है या एक लाश का एक लाख मिले इसलिए ये ख़त लिख रहा हू ये सिर्फ इसलिए लिख रहा हूँ क्यों की मै थक गया हूँ धमाको की आवाजो से और बेशर्म बयानों से जैसे आज सुन ने को मिला की १४ महीने बाद धमाका हुआ है।क्या अब धमाको पर भी आप अपनी पीठ थप थापा येंगे ?

वर्त्तमान -
वेलेनटाइन डे पर क्यों शोर कर कर रहे हैं - अच्छा खासा सो रहा था, जगा दिया और ये क्या हैं उफ़ एकऔर लैटर , पापा कब समझेंगे की इन सब से कुछ नहीं हुआ हैं और ना होगा, होना होता तो कब का हो जाता

बाबा- वर्त्तमान इतने निराशावादी नही हो?
वर्त्तमान- नही मै क्यों होने लगा में खुश हूँ मेरे पास जॉब हैं लाइफ सेट हैं और इन धमाको के बारे में सोचने के लियेटाइम कहाँ हैं
अब फिर सोने जा रहा हूँ कोई शोर ना मचे घर में ,शाम को माय नेम ईज़ खान देखने जा रहा हूँभविष्य ये सब छोड़ो और अपना सोचो ना की देश का

वर्त्तमान दिशाहीन हो रहा है भविष्य भी हो उस से पहले सोचिये....

Saturday, 13 February 2010

आखरी सांस आखरी आंसू

प्रत्यक्ष - माँ, माँ, माँ!
माँ - आराम से, आराम से

माँ - लाओ, बैग और बोतल

प्रत्यक्ष - नही माँ, मै बड़ा हो गया हूँ

माँ - अच्छा जी, सुबह से दोपहर में बड़े हो गये
?
प्रत्यक्ष - जी हाँ, अब से मै शरारत भी नहीं करूंगा

माँ - क्या हुआ, टीचर ने डांटा?
प्रत्यक्ष - नहीं

माँ - किसी ने कुछ कहा?
प्रत्यक्ष - नहीं, माँ

माँ - तो फिर मेरा बच्चा शरारत क्यों नहीं करेंगा ?
प्रत्यक्ष - मैं अब बड़ा और अच्छा बच्चा हो गया हूँ

माँ- कुछ तो बात है, बोलो?
प्रत्यक्ष - माँ, होली आ रही है

माँ- अब समझी, पिचकारी चाहियें?
प्रत्यक्ष - नहीं

माँ - फिर क्या हो सकता है?
प्रत्यक्ष - सोचिये, सोचिये?
माँ- गुब्बारे नहीं दिलाऊंगी, उससे चोट लगती हैं
गुब्बारे तो हरगिज़ नहीं
प्रत्यक्ष - नही माँ, गुब्बारे भी नही

माँ - फिर क्या हो सकता है ?
प्रत्यक्ष - सोचिये, सोचिये?
माँ - पता नही, तुम ही बोल दो

प्रत्यक्ष - माँ होली पर गुजिया खाये?
माँ - जल्दी चलो, बस ना छूट जाये

प्रत्यक्ष - माँ गुजिया!
माँ - मैंने कहा ना जल्दी चलो, आओ गोद में ले लेती हूँ

प्रत्यक्ष - नही छूटेगी बस, आप ने कुछ कहा नही

माँ- किस बारे मे

प्रत्यक्ष - गुजिया के बारे मे

माँ- गुजिया खायेंगे , पर अगले साल

प्रत्यक्ष - नही मुझे इस बार ही खानी है

माँ - बेटा ज़िद नही करते , अगले साल पक्का

प्रत्यक्ष - ओक्के

माँ - अच्छा गुब्बारे ले लेना

प्रत्यक्ष - नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिये

माँ- राजा बेटे गुस्सा नही करते

प्रत्यक्ष - भ्रष्टाचार रोज़ गुजिया लाता है, क्या हम होली पर भी नही खा सकते?
माँ - बेटा हमे दूसरे क्या खाते है और क्या पहनते है वो नहीं देखना चाहिए
पता है हमारे चुने हुए वो लोग कहते है
" चीनी न खाने से मौत नहीं आती और शक्कर से बने सामान से मधुमेह (बीमारी) बढती है
"
माँ - प्रत्यक्ष, मधुमेह से मर भी सकते है

प्रत्यक्ष - पर..........ओक्के !
प्रत्यक्ष - हम अब इतने गरीब हो गये है की गुजिया भी नही खा सके?

तभी जमाखोर (कार) आई और माँ को कुचल के चली गयी


प्रत्यक्ष - माँ, माँ, माँ - उठो मै मज़ाक कर रहा था, माँ उठो मै गुजिया नही खाऊँगा, ना ही कभी खाने को बोलूँगा


नमस्कार हम हैं भरत के नंबर समाचार चैनल जो ये सबसे पहले दिखा रहे है, आइये लाश के पास रोते हुए बच्चे से पूछे?
रिपोर्टर-ये औरत मर गयी, आपको कैसा लग रहा है?
प्रत्यक्ष - ये औरत मेरी माँ है

रिपोर्टर - एक और ब्रेअकिंग न्यूज़ - ये लाश इस मासूम की माँ की है, लोग कितने संवेदनहीन हो गये है की एक मासूम की माँ को सरे बाज़ार मार दिया गया

कैमरा मैंन - बेटा जरा कैमरे मे देख कर रो
- तुम्हारा चेहरा छुप रहा है। जोर से रो तुम्हारी माँ मर गयी है
प्रत्यक्ष - नही मेरी माँ मर नही सकती

रिपोर्टर - हाँ पर ये स्पेशल रिपोर्ट जब तक ख़तम होगी तब तक ज़रूर मर जायेंगी

प्रत्यक्ष - नही, मेरी माँ नही मर सकती

रिपोर्टर - क्यों ?
प्रत्यक्ष - माँ कह रही थी शक्कर खाने से मर सकते है पर उन्होंने खायी ही नही, फिर माँ कैसे प्राण त्याग सकती है ?
रिपोर्टर - ये बच्चा कुछ अजीब बात कर रहा है, इसे छोडिये और आप इस घटना का मज़ा लीजिये

रिपोर्टर - और आप लोग कही मत जाइए, हम इस औरत की आखरी सांस और इस लड़के के आखरी आसूं तक कैमरे के साथ बने रहेंगे
तब तक आप अपनी राय sms करें और जो सब से ज्यादा sms करेगा उसे होली की गुजिया का डब्बा मिलेंगा जी हां आप ने सही सुना - गुजिया का डब्बा जहाँ आज लोग ५० रुपैये की शक्कर चाय में नहीं ड़ाल पा रहे है उस समय हम आप को दे रहे है गुजिया का डब्बा तो ये मौका छोडिये नहीं - हम जल्द हाज़िर होते है हमारी ब्रेअकिंग न्यूज़ के साथ - आखरी सांस आखरी आंसू.......


Monday, 25 January 2010

संकीर्ण और संकुचित सोच

सम्मानीय प्रतिभा मौसीजी नमस्कार,
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये

मौसीजी, रविवार को राज्य महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का विज्ञापन देखाबड़ा अफ़सोस हुआ, उसके बाद कई कार्यक्रम देखे व लेख पढ़े उससे जो पीड़ा मुझे हुई वो मै शब्दों से व्यक्त नही कर सकताआखिरकर मै हू तो वह ही आम इन्सान, जो पीड़ा की अग्नि में जीवन व्यतीत कर देता है पर उस अग्नि से क्रांति की मशाल नही जलाता है
हर व्यक्ति को इस विज्ञापन से केवल यही आपत्ति है की किसी पाकिस्तानी सैनिक की फोटो लगा दी
मेरे विचार से इस मे कृष्ण तीरथ की कोई गलती नही हैगलती उस कुर्सी की है जो रक्षक और भक्षक मे अंतर करना बंद कर देती हैयह भी हो सकता है की गूगल मे एंटर कर दिया होगा और उस मे इस पाकिस्तानी की भी फोटो आ गयी होगी, और उसे देखकर प्रसंचित हो गई होंगी की वहां ये फोटो लगाओ इतने तमगे लगे है - विज्ञापन और अच्छा लगेगा, फिर चाहें तमगे भारतीयों के रक्त बहाने के लिए ही क्यों ना मिले हो - चाहें इस से मेरी थल, जल और वायु सेना का अपमान ही हो
यदी ऐसा नही है तो फोटो लगी कैसे???
ये देशद्रोह हुआ कैसे???
मौसी कुछ तो बोलिये???
मौसी विज्ञापन के लिए
कृष्ण तीरथ ने कहा हम ने सिर्फ तस्वीर को देखा भाव को नही । जो दिखा व जो पढ़ा -वह ही तो समझेंगे उनके ह्रदय में तो नही झांक सकते मौसी, कृपया ये पंक्ति पढ़े और मुझ मुर्ख को समझाये की इसका क्या अर्थ है?

Where would you be

if your mother was

not allowed to be born???

इस में ये दर्शाया जा रहा है की महान पुरुष नही होते यदि माँ नही होती, इसलिए बालिका हत्या नही होनी चहिये ।इससे संकीर्ण और संकुचित सोच नही हो सकती

नारी रक्षा के लिए विज्ञापन देना ही था तो ये देते की बालिका हत्या नही होनी चहिये क्यों की नारी मात्र जननी नही है। बड़े-बड़े अक्षरों में लिखते की बेटी अर्थात राष्ट्र का सम्मान कृष्ण तीरथ से पूछिए क्या भारत में महान व सफल नारी का अकाल पड़ा है जैसे अनाज का या सोच का अकाल है? इससे अच्छा तो इनकी तस्वीर लगात्ती

  • प्रतिभा पाटिल
  • इन्द्रा गाँधी
  • सरोजनी नायडू
  • विजय लक्ष्मी पंडित
  • सुचेता कृपलानी
  • मीरा कुमार
  • आरती शाह
  • कादम्बिनी गांगुली
  • चंद्रमुखी बासु
  • कामिनी रायसोराबजी
  • असीमा चटर्जी
  • कुमारी फातिमा बीवी
  • किरण बेदी
  • अन्ना चांदी
  • दुर्बा बनर्जी
  • कल्पना चावला
  • कम्लिजित संधू
  • बचेंद्री पाल
  • निरुपमा वैद्यनाथन
  • पी. टी. उषा
  • के. मल्लेश्वरी
  • कोनेरू हम्पी
  • सानिया मिर्ज़ा
  • सायना नेहवाल
ये कुछ नाम है जो मुझे याद है

आज भी लडकियों को पढाया नही जाता है और जिन्हे पढ़ाया जाता है उनमे से ९०% का लक्ष्य मात्र शादी होता है।आज भी लड़की को उसके वस्त्रो से चरित्र का आकलन होता है उस समाज में इस तरह का विज्ञापन किसी घोर अपराध से कम नही है इस तरह के विज्ञापन से यही सन्देश मिलेगा की नारी मात्र जननी है
मौसी
यह तो तब हो रहा है जब आप भारत की प्रथम नागरिक है कृपया कर के कुछ करिये ................

आप का
आदित्य